Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 145, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 145, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 145 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अध्वगं संभ्रमवशात्तप्तधूलिविधूसरम् ।
दूरादमृतवद्दृष्टं स्निग्धच्छायाध्वपादपम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदाकाशरूप मैं चिन्मात्र परमाणु होकर भी जगद्रूप से स्थितरहू ओर जहाँ चिदाकाशरूप
मैं रहता हूँ वहीं त्रिलोकी को देखता हूँ