Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 147, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 147, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 147 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
अथाहमभवं तत्र तदालिङ्गननिर्वृतः ।
गृहीतवासनो नूनं विस्मृतप्राक्तनस्मृतिः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार सर्वसत्तात्मक ब्रह्म मे अस्तित्व ओर नास्तित्व का अथवा विधि और निषेध का अवकाश
नहीं है, ऐसा कहते है ।
सर्वसत्तात्मक ब्रह्म है, सर्वसत्तात्मक जगत् है जरा बतलाओ तो सर्वसत्तात्मक ब्रह्म में कौन-सी
विधिर्यो ओर कौन से प्रतिषेधो का संसर्ग हो सकता है ?