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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 149, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 149 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

यदि कोई कहे कि बाह्य, घट, पट के आकार ही संवित्‌ से अपना सम्बन्ध होनेपर संवित्‌ की स्वाकारता में कारण हों, इस पर कहते है। घट, पट आदि का आकार संवित्‌ के स्वाकार में परिणत होने मेँ तब कारण माना जा सकता है जबकि सृष्टि मेँ किसी दूसरे कारण का निरूपण करना संभव होता । लेकिन जब पूर्वोक्त युक्ति से सृष्टि अकारण (कारण के बिना ही उत्पन्न) है तव चित्‌ से अनन्य (अभिन्न) आकार आदि चित्‌ के घट आदि के आकार में परिणत होने मे कदापि कारण नहीं हो सकता