Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 149, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 149 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
तो क्या सारा का सारा नियतिरूपी महल ढह गया ? ऐसी आशंका होनेपर नकारात्मक उत्तर
देते हैं ।
यहाँ जो चिति जब जैसे स्फुरित होती है वह वस्तु तब वैसी पारमार्थिक, व्यावहारिक या प्रातिभासिक
होती हे इस प्रकार की ही नियति व्यवहारपर्यन्त रहती ही है अन्यथा नहीं होती है