Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 149, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 149 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
स्वप्न की सत्यतानियति तो सर्वत्र शात्रानुसार होती है, इसलिए काकतालीयवत् ऐसा हमने कहा
है, ऐसा कहते हैं।
नियति के अभाव से ही स्वप्न में कभी कभी सत्यता ओर कभी असत्यता होती है, इसलिए
स्वप्नसत्यत्व काकतालीय ही हे