Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 149, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 149 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
मणि, मन्त्र, ओषध आदि रूपसे प्रयुक्त स्वप्नसत्यता-नियति तो जाग्रत् प्रतीति में भी तुल्य है,
ऐसा कहते हैं।
मणि, मन्त्र ओर ओषधिरूप स्वात्मा से स्वप्न आदि की जो सत्यता नियत है वह सत्यता तो जाग्रत
में भी दिखाई देती है