Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
सहज चिन्मात्ररूप स्वाध्यस्त में वेदनानुसार सत्त्वादि का निर्वाहक है, ऐसा कहते है ।
सर्वव्यापक इस चिन्मात्र का ऐसा स्वाभाविक रूप हे कि जहाँपर यह जैसा जानता है वहाँ पर वैसा
ही हो जाता है