Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
इसीलिए सव वस्तुएँ सकारण हैं अथवा अकारण हैं इत्यादि वादों की भी उसकी कल्पना के अनुसार
ही व्यवस्था है, ऐसा कहते है।
जब यह सब वस्तुएँ सकारण हैं ऐसी कल्पना करता है तब सब कुछ सकारण है जब यह सब
अकारण ही है ऐसी कल्पना करता है तब सब अकारण ही है