Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 48
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हिन्दी अर्थ
ज्वालाओं के धाँय धाँय शब्दों से आकाश के मध्यभाग को उसने गुँजा दिया था और गुफारूपी गृह से
निकले हुए निद्राविहीन वनचरों को भ्रम में डाल दिया था