Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 153, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 153, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 153 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
ततो वहति कालोऽयमृतुसंवत्सरात्मकः ।
स्थितोऽहमागतान्भावांस्त्यजन्गृह्णन्गिरिर्यथा ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
अन्य मुनिने कहा : हे महामते, मेरे इस आख्यान को सुनिये, मँ दूसरा आख्यान आपसे संक्षेप से कहता
हूँ। मेरे विस्तारयुक्त व्याख्यान का तो अन्त मिलना भी कठिन हे