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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 153, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 153, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 153 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

नाभिवाञ्छामि मरणं नाभिवाञ्छामि जीवितम् । यथा स्थितोऽस्मि तिष्ठामि तथैव विगतज्वरम् ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मुने, मैं दीर्घं तपस्वी हूँ और आप अत्यन्त धार्मिक हो । मैं जब तक आप व्याधगुरु होओगे तब तक यहीं पर हूँ, आप भी यह मेरा सत्य वचन सुनकर यहीं अपने घर पर ही रति को प्राप्त होओगे