Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 155, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 155, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 155 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
कियदन्तमिदं दृश्यं स्यात्पश्याम्येतदादितः ।
दूरतोर्ध्वप्रमाणेन तपोलब्धशरीरकः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे व्याध, इस प्रकार जैसी स्थिति
है उसके अनुकूल यहाँपर स्थित हुए मेरे सामने आज काकतालीय के समान तुम प्राप्त हुए हो