Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 156, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 156, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 156 · श्लोक 44
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हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण अवकाश को ढक
चुके इस शरीर का मैं अवश्य त्याग करता हूँ। इस अतिविशाल कुशरीर से मैं साधुसंगति, सत्शास्त्र का
अभ्यास अथवा अन्य मोक्षसाधन कुछ प्राप्त नहीं कर सकता