Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 157, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 157, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 157 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं यतते तथा ।
सोऽवश्यं तदवाप्नोति न चेच्छ्रान्तो निवर्तते ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
मन्त्री
कहेगा : हे प्रभो, शत्रुनाश करनेवाले महाराज का पूर्वजन्म का अशुभ अभ्यास है, इसलिए आपने देवी
को प्रणाम कर मुक्ति के लिए देवी की प्रार्थना नहीं की