Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 16, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
मेरुमूर्धनि मामेवमुक्त्वा स विहगाधिपः ।
तूष्णीं बभूव मुक्तात्मा ऋष्यमूक इवाम्बुदः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, मेरु पर्वत के शिखर पर इस तरह मुझसे कहकर
विहंगों के अधिपति मुक्तात्मा भुशुण्डीजी ऐसे चुप हो गये, जैसे कि ऋष्यमूक पर्वत के ऊपर मतंग
ऋषि के आश्रम में उनके शाप के भय से मूक होकर मेघ चुप हो जाते हैं