Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 16, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अहमापृच्छ्य तं सिद्धं विद्याधरमथो पुनः ।
प्राप्त आत्मास्पदं राम मुनिमण्डलमण्डितम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीराम, तदनन्तर
उस सिद्ध भुशुण्डीजी से पूछकर उनकी आज्ञा से मैं उस विद्याधर के पास उक्त संवाद के विषय में
पूछताछ करने के लिए चला गया । वहाँ से सारी बातें ठीक-ठीक जानकर मैं फिर मुनिमण्डलमण्डित
अपने आश्रम में आ गया