Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 16, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
एतत्तवाद्य कथितं बलिभुक्कथोक्तं विद्याधरोपशमनं लघुबोधनोत्थम् ।
अस्मिन्भुशुण्डविहगेन्द्रसमागमे मे चैकादशेह हि गतानि महायुगानि ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, आज मैंने आपसे काकभुशुण्डीजी के द्वारा कही
गई कथा से प्रतिपादित विद्याधर की परम विश्रान्ति, जो तत्त्व ज्ञान के कारण तत्काल ही उत्पन्न
हुई थी, सुनाई । हे रामचन्द्रजी, इस वर्णित मेरे विहंगेन्द्र भुशुण्डजी के समागम के अनन्तर इस कल्प
के ग्यारह दिव्य युग बीत चुके हैं