Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 160, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 160, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 160 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
तान्येव सिद्धसद्मानि व्योम्नि भान्ति परस्परम् ।
अदृष्टान्यप्यसंख्यानि सूपलब्धान्यसन्त्यपि ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुवर, तदनन्तर उसने मुझे पकड़कर घर ले जाकर तीन दिन अपने घर रक्खा,
फिर वह आपकी क्रीडा के लिए मुझे यहाँ लाया