Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 164, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 164 · श्लोक 13
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हिन्दी अर्थ
जिसका मन अन्दर संवित् में रसिकता और बाहर नीरसता के अभ्यास में
कभी निर्वेद को प्राप्त नहीं होता, ऊबता नहीं हे, उसका मन शान्त होता हे