Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, Verses 37–38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 164, verses 37–38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 164 · श्लोक 37
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हिन्दी अर्थ
अप्रबुद्ध बालक द्वैत, अद्वैत आदि भेदों से युक्त वाक्यरचना के विलासो से क्रीडा करते हैं, ज्ञानवृद्ध
पुरुष उनको हँसते हैं