Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 164, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 164 · श्लोक 52
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हिन्दी अर्थ
इस शास्त्र के ज्ञात होनेपर, समझ में आनेपर,
वेदान्तो में महर्षि श्रीवेदव्यास आदि द्वारा प्रदर्शित तात्पर्य के निर्णय के अनुकूल उपक्रम, उपसंहार
आदि लिंगवाले तर्को से व्यवस्थित सिद्धान्त समझ में आ जाता है | यह उत्तम आख्यान सकल
शास्त्रदृष्टियों में श्रेष्ठरूपसे प्रख्यात हे