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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, Verse 53

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 164, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 164 · श्लोक 53

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

मैं यह आप लोगों के उपर कृपा करके कहता हूँ किसी प्रकार के छल-कपट से नहीं कहता हूँ । आप लोग प्रयत्न से विचारित इस शास्त्र से इस दृश्यसंघात को माया यानी मिथ्या समझ सकते है, इसलिए आप लोग इस शास्त्र का चिन्तन करें