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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 167, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 167, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 167 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । जाग्रत्स्वप्नात्मकमिदं मन्ये स्मृत्यैव दृश्यते । सद्रूपबाह्यार्थकृता स्मृतिरेवेह कारणम् ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

इस विषय में कर्णविभूषण यह महान्‌ आख्यान आप सुनिये | यह आख्यान द्वैतदृष्टियों को नष्ट करनेवाला है ओर ज्ञानरूपी सूर्य को चमकानेवाला है