Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 167, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 167, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 167 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
तस्या भानमभानं तद्भास्वरं जिह्ममेव वा ।
नान्यत्स्वभाववत्स्पन्द इव वायोर्महाचितेः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने कहा : हे ब्रह्मन्, वर्ह पर उन रेखाओं को किसने देखा है, वे किस तरह की है ओर
अति निबिड पत्थर के अन्दर स्थित वे कैसी देखी जा सकती है । कृपया यह कहिये