Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 167, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 167, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 167 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
मुधा व्योम्न्येव पृथ्व्यादितया वेत्ति तदा तदा ।
स्वस्यैव तस्य भानस्य धत्ते पृथ्व्यादिकल्पनाम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
ये सब हम लोग भी उस परमात्ममहासत्तारूप शिला के मांस की तरह स्वरूपभूत ही हे ।
उक्त परमात्ममहाशिला से अभिन्न होते हुए भी भ्रमवश अपने को उससे भिन्न समञ्जते हैं