Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 169, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 169 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

दुष्कृतैः कृतपाथेयो लुठन्क्षीणः पदे पदे । अर्थानर्थमयैर्मार्गैः संकटैर्विवशीकृतः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए स्वाप्नबोध की अनुभवरूपता का अपलाप न हो सकने से दृष्टान्त है ही, अतः जो मैंने कहा, वह सिद्ध हुआ यों उपसंहार करते हैं। इसलिए समुद्र आदि मे आवर्तौ की तरह काकतालीय के समान अकस्मात्‌ चित्‌ में जो यह जगत्‌ स्फुरित होता है उसी में जाग्रत्‌ ओर स्वप्न के अनुभव की सिद्धि के बाद स्वप्न आदि की कल्पना होती हे