Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 169, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 169 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
संसारजलधेः पारं प्राप्य भूतविवर्जितम् ।
अशय्योऽतिप्रमाबुद्धः स शेते सुखमात्मवान् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
समुद्र मे तरंग आदि की तरह अबुद्धिपूर्वक उत्पन्न सृष्टि में स्वप्न आदि की अनुभवसिद्धि के
अनन्तर सन्निवेश ओर स्थिति सम्पन्न होती हे