Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 170, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 170, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 170 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
लोकोपचारकं पूज्यं स्मितपूर्वाभिभाषणम् ।
कामोपशान्तं सद्रूपं परमार्थैककारणम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
उत्तम पुरुष सदेह होते हुए तथा व्यवहार में निरत होते हुए भी सोये हुए से, विदेह से ओर मूढ से दिखाई
देते हें वास्तव में वे जड़ (मूढ) नहीं हैं