Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 170, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 170, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 170 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
पालकं शीलसाराणां दाराणां च कुलस्य च ।
आधिव्याधिपरीतस्य चेतसोऽमृतमौषधम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
तब किस अंश से उसकी सुप्त से समता है यह पूछो तो विश्रान्ति और मौन से है, ऐसा कहते हैँ ।
दीर्घमार्ग में परिभ्रमण से निवृत्त होकर श्रम से रहित हुआ जो पुरुष वाक्य मुख से बाहर नहीं
निकालता वह सुख मौनस्थ कहा जाता है, न कि जडाकृति कहलाता है