Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 170, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 170, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 170 · श्लोक 38
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हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण जगत्पदार्थो की घटः सन् पटः सन्" इस प्रकार सत्रूप से सर्वत्र अनुगम होने के
कारण सत्तासामान्यता को प्राप्त हुआ आकाश से अधिक व्यापक (=) आत्मज्ञानी पुरुष सुख से
सोता है