Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 173, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 173, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 173 · श्लोक 46
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हिन्दी अर्थ
जगद्रूप ब्रह्मसत्ता अपने से अपने में मानों उत्पन्न सी होकर पीछे सत्य अर्थ देनेवाली-
सी पृथिवी आदि संज्ञाएँ करती है