Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 176, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 59
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हिन्दी अर्थ
स्वप्नपर्वत के तुल्य स्वच्छ दृश्य स्वाधिष्ठान चिन्मात्र से रचभर भी भिन्न नहीं हे,
इसलिए चिदाकाशमात्ररूप से परिशिष्ट चिदाकाश की आकाश की अपेक्षा भी अतिसूक्ष्मता सिद्ध
हुई, यह अर्थ है