Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 176, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 60
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हिन्दी अर्थ
सकल रूपों से विरहित सच्चिदानन्दघन जो परम ब्रह्म है वही अपने
सच्चिदानन्दघन स्वरूप से रंचभर भी च्युत न हो यथास्थित ही सृष्टि के रूप से स्थित हे