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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 177, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 177, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 177 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

एकबोधमयाः शान्तविज्ञानघनरूपिणः । तज्ज्ञास्तेषामसद्रूपे कथमर्थे विचारणा ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

विकल्पाभासों के आरोपण द्वारा अविकल्प आत्मा को स्वयं निम्न स्तर पर पहुँचा रही बुद्धि ने स्वप्न में “मे मन हूँ” यों अपने को असत्‌मयमन रूप देखा