Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 18, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
तानि बुद्ध्यैव दृश्यन्ते न दृष्ट्या रघुनन्दन ।
पुरः संकल्परूपाणि स्वस्वप्नपुरपूरवत् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुनन्दन, अपने
स्वप्न में देखे गये नगरसमूह के तुल्य ये संकल्पकल्पित जगत् बुद्धिचक्षु से ही सामने दिखाई
देते हैं, चर्मचक्षु से नहीं