Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 18, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
कल्पितेनोपमानेन यदेतदुपदिश्यते ।
तत्रोपमैकदेशेन उपमेयसधर्मता ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीका अनुभव कराने के लिए श्रुति ओर मेने निधी के पिण्ड ओर लोहे के गोले आदि द्ष्टान्त
यद्यपि अचेतन है तथापि उनमें चेतनत्वका आरोप करके एक देश के साम्य से उनका उपन्यास
किया है, यह कहते हैं /
कल्पित जडात्मक लोहे आदि के उपमानरूप से जो मैंने उपदेश दिया है, वहाँ उपमा के केवल
एक अंश से उपमेय के साथ सधर्मता, समानता है