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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 183, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 183, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 183 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

देवानामधिको रुद्रो रुद्रांशप्रभवो मुनिः । इत्युक्त्वा प्रोद्यता तेषां चक्रुः शृङ्गाण्यगा इव ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

इसके बाद इस ऋतु,संवत्सर आदिरूप समय के बीतने पर आसपास में रहनेवाले लोगों ने सम्पूर्ण वन छिन्न-भिन्न कर डाला