Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 183, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 183, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 183 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
हे शापाः पापतां त्यक्त्वा कार्यस्यान्तो विचार्यताम् ।
यत्कार्यं कलहस्यान्ते तदेवादौ विचार्यताम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
इसके पश्चात् तो आप दोनों महातपस्वी इस प्रदेश में आये यह सब ध्यान
से देखा गया सम्पूर्ण वृत्तान्त मेने सकल रूप से आप लोगों से कहा