Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, Verse 67

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 187, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 187 · श्लोक 67

संस्कृत श्लोक

दिक्कालभेदाज्जीवोऽयं नियतामाकृतिं गतः । सर्वेणाङ्गेन नो सर्वं वेत्त्यसर्वात्मतावशात् ॥ ६७ ॥

हिन्दी अर्थ

उस प्रजापति ने (ब्रह्माने) विविध प्रजा, धर्म, दान, तपस्या, गुण और ज्ञान का उपदेश करनेवाले वेद, शास्त्र तथा पंचभूतोका संकल्प (सृष्टि) किया हे