Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, Verse 68
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 187, verse 68 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 187 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
इति कलनमनन्तमात्मनोन्तर्गतमनुमेयमनन्यदात्मभूतम् ।
न तदुदयमुपैति नास्तमेति स्थितमुपलोदरवद्धनं सुमौनम् ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस प्रजापति ने यह भी कल्पना
की कि वेदवेत्ता तपस्वी लोग वादों से अथवा स्वाभाविक वृत्ति से जो कहें वह शीघ्र ही हो जाय