Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 188, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 188, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 188 · श्लोक 49
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हिन्दी अर्थ
उस वेदरूप शब्दसार से शब्दराशि से निर्मित अर्थो की राशि के परिणाम से विस्तारवाली सम्पूर्ण
जगत्-शोभा उदित होगी, क्योकि “स भूरिति व्याहरत् भुवमसृजत। एत इति वै प्रजापतिर्देवान्। इन्दव
इति पितृन् (प्रजापति ने 'भू” का उच्चारण कर देवताओं की सृष्टि की, “असृग् इससे मनुष्यों की
सृष्टि की, “इन्दवः“ इसका उच्चारकर पितरों की सृष्टि की) ऐसी श्रुति है