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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

स चाप्यपञ्चभूतात्मा पञ्चभूतात्मकोपमः । विराडात्मैकपुरुषः परमः परमेश्वरः ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

समस्त प्राणियों का समष्टिरूप अद्बय विराट्‌ पुरुष परम परमेश्वररूप है और पंचभूतात्मा न होने पर भी पंचभूतात्मा के सदृश भासमान है