Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अनन्तमूर्ध्वं मूर्धास्य तथाधः पादयोस्तलम् ।
अपराकाशमुदरमिदं ब्रह्माण्डमण्डपम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्त
आकाश इस पुरुष का मस्तक है, पृथिवी इसके पैर का तलवा है, मध्याकाश इसका उदर (&) है
तथा यह ब्रह्माण्ड इसका शरीर है