Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
लोकान्तराण्यनन्तानि पार्श्वकाः क्षतजं पयः ।
मांसपेश्यः क्षितिधराः सरितः संतताः शिराः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्त लोक इस विराट् पुरुष के पार्श्व के अवयव हे,
जल रक्त हैं, समस्त पर्वत मांसपेशियाँ हैं और निरन्तर बह रही ये नदियाँ इसकी नाड़ियाँ हैं