Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
रक्ताधारा जलधयो द्वीपान्येवान्त्रवेष्टनम् ।
बाहवः ककुभः स्फारास्तारका रोमसंततिः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
ये सब समुद्र रक्तसंचय की पेशियाँ हैं, सभी द्वीप छः कोशों के वेष्टन हैं, दिशाएँ बाहु हैं और ये
चमकते तारे (770) रोमसमूह हैं