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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

पञ्चाशदनिलस्कन्धा एकोनाः प्राणवायवः । मार्तण्डमण्डलं चण्डं पित्तं जठरपावकः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

आवह, प्रवह आदि उनचास पवन इसी प्राणवायु, मार्तण्डमण्डल इसकी क्रूर आँखें और बडवानल इसका चित्त है