Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
शशाङ्कमण्डलं जीवः श्लेष्मा शुक्रं सितं बलम् ।
मनः संकल्पकोशात्म सारात्मा परमामृतम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
चन्द्रमण्डल ही इस विराट् पुरुष का जीव,
श्लेष्मा, वीर्य, बल, चर्बी और संकल्पात्मक मन है तथा ब्रह्म ही साररूप आत्मा है