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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

नभस्येव नभोरूपा यदिदं भासते जगत् । अनाद्यन्तमिदं तस्याः सर्गाः सर्गात्मभासनम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे मुनिवर, भूत, भविष्यत्‌ ओर वर्तमान काल में स्थित यह जगत्‌दृष्टि, जिसका कि प्रतिदिन सबको अनुभव हो रहा है, उत्पन्न नहीं हुई यह आप क्या कहते हैं ? भूत, भविष्यत्‌ आदि अनन्त वस्तु गोचर अनन्त सर्वजनहित प्रत्यक्ष आदि का एक तत्त्वज्ञान से केसो बाध हो सकता है ? यह श्रीरामचन्द्रजी की शंका का तात्पयर्थहि