Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
स्वभावभूतमस्माकं त्विदं भाति महात्मनाम् ।
भास्यभासकसंवित्तिर्नश्यति प्रतिभामिता ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, स्वप्न पदार्थ, मृगतृष्णा जल, द्विचन्द्र तथा संकल्पित पदार्थो की
तरह अहं त्व् आदि मिथ्या जगत् केशोण्ड्रक के समान स्फुरित होता है । उस प्रकार के अनन्त स्वाप्न
ज्ञानो का एक जागरण से बाध दिखलाई देता है