Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
तदा तु नाम सर्गादौ नासीद्भास्यो न भासकः ।
मिथ्याज्ञानवशादेव स्थाणौ पुंस्प्रत्ययो यथा ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन् ! अहम्, त्वम्, अयम् इत्यादि पूर्णरूप से अनुभूयमान जगज्जठर
सर्ग के आदि में कैसे उत्पन्न नहीं हुआ ?